निजी हित के लिए हो रहा शासकीय राशि का दुरूपयोग

राजदीप शर्मा
छोटे कापसी। ग्राम पंचायत बड़े कापसी में शासन की योजनाओं के तहत कराए जाने वाले कार्यों में घोर लापरवाही बरती जा रही है। कहा जा रहा है कि शासकीय धन की निजी हित के लिए हेराफेरी की जा रही है। आरईएस के इंजीनियर,सरपंच और सचिव सभी कार्य आधे-अधूरे कराकर शासन की मंशा पर पानी फेर रहे हैं। इसका खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं। बड़े कापसी प्राथमिक शाला में शासन द्वारा स्कूल के अतिरिक्त कमरा निर्माण के लिए लगभग 5 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी। सरपंच और सचिव द्वारा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग (आरईएस) के सब इंजीनियर के सुपरविजन में कमरा निर्माण का काम शुरू कराया गया। लगभग दो साल बीत जाने के बाद भी निर्माण पूर्ण नहीं हो पाया है। जो एक साल से बंद पड़ा है। जिसकी वजह से बड़े कापसी गांवों के विद्यार्थियों को पढ़ाई करने में दिक्कत हो रही है।

मौजूदा प्राथमिक शाला भवन में कमरों की कमी है। एक ही कमरे में सभी कक्षा के बच्चे बैठते है जबकि विद्यार्थियों की दर्ज संख्या बहुत ज्यादा है और साल दर साल विद्याथियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। ग्रामीणों का कहने है सरपंच पति के द्वारा अतिरिक्त कक्ष निर्माण का काम करवाया जा है। पूरे पंचायत में सरपंच पति की दखलंदाजी चलती है। बताते हैं कि सरपंच पति से सब इंजीनियर की सांठगांठ है। वे सरपंच पति से मोटा कमीशन वसूलते हैं।
कक्ष का पूरा स्ट्रक्चर खड़ा किया जा चुका है। छत ढलाई, प्लास्टर, व दरवाजे खिड़कियां लगाने का काम अटका दिया गया है। गांव के लोग बताते हैं कि निर्माण में घटिया सीमेंट,ब्रिक्स,हल्के स्तर की सीमेंट एवं जंगली बोल्डर का उपयोग किया गया है। बड़े अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। निर्माण के लिए शासन से प्राप्त स्वीकृत राशि का सब इंजीनियर,सरपंच और सचिव घटिया निर्माण करा कर,राशि का बंदरबांट करते है ऐसा ग्रामीणों को अंदेशा है। ग्रामीणों की माने तो इससे पहले अतिरिक्त प्रभार में रहे सचिव रंजीत विस्वास पर सरपंच पति बहुत दवाब बना कर राशि निकलने को कहा,परन्तु सचिव रंजीत विस्वास ने माना कर दिया। तालमेल ना बैठने से सरपंच पति ने अपने ऊची पहुँच से रंजीत सचिव हटवा दिया,अब अपने चहेते सचिव की पोस्टिंग बड़े कापसी पंचायत में करवा ली। ग्रामीणों का सवाल है कि वर्तमान सरपंच का कार्यकाल समाप्त होने वाला है तो क्या कार्य पूरा हो पाएगा?

इस विषय पर निर्माण करवा रहे सरपंच पति से पूछने पर बतलाया कि मेरे द्वारा काम करवा जा रहा है,अभी गक दो लाख रुपये ही मिला है,सचिव को पैसा निकलने बोलता हूं,तभी तो काम पूरा होगा।

इस संबंध में तत्कालीन सचिव देवदास मंडल ने बताया कि मेरे रहते समय दो लाख के आसपास का पहला बिल निकाला गया था,उसके बाद का मेरी जानकारी में नही है।

इस संबंध पर सब इंजीनियर धनेश्वरी पथर से मो नं.95167 63249 पर संपर्क किया गया तो उनके द्वारा फोन रिसीव नही किया।

इस संबंध पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी कोयलीबेड़ा घनश्याम जांगड़े ने बतलाया कि किसी कारण निर्माण कार्य रुका हुआ है पता करवा,जल्द ही कार्य प्रारंभ करने के आदेश जारी करवाता हूँ।

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