जान जोखिम में डाल कर शिक्षा अध्ययन करने के लिए मजबूर हैं छात्र, किसी बड़ी घटना के बाद शायद जागेगा प्रशासन

राजदीप शर्मा
छोटे कापसी। प्राथमिक शाला इरिकबुट्टा का स्कूल भवन इतनी जर्जर स्थिति में है कि किसी भी दिन यहां बड़ा हादसा हो सकता है। प्रशासन पूरी तरह से मूकदर्शक बना हुआ हैं जिस कारण बच्चे अपने जान को जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हो गए हैं। इस मामले में हमने प्राथमिक शाला के हेड मास्टर असी लाल मंडावी,शिक्षक हरिनारायण पटेल से बातचीत की तो पता चला कि कि तत्कालीन बीईओ को उन्होंने लिखित रूप से आवेदन और ग्राम पंचायत इरिकबुट्टा सरपंच को मौखिक तौर से कई बार बोला कर ध्यान आकर्षित कराने का प्रयास किया गया है फिर भी उच्च अधिकारी एवं सरपंच पूरी तरह से मौन है, और अब जब से नए खंड शिक्षा अधिकारी ने पदभार संभाल है तब फिर से एक बार आस जगी है की जर्जर भवन का मरम्मत का कार्य जल्द ही होगा। बारिश की वजह से जर्जर भवन में बच्चों को बैठाया नही जा सकता में,बच्चों को अतिरिक्त भवन के एक कमरे में 39 बच्चों को एक साथ बैठकर पढ़ाई करवाई जाती है। शिक्षक ने बताया कि पिछले सरपंच के कार्यकाल में मरम्मत करवाया गया था, वह मरम्मत नही खानापूर्ति थी इसी वजह से समस्या जस की तस बनी हुई है।आपको बता दे कि भवन इतना जर्जर अवस्था मे है कि छत का प्लास्टर कभी भी नीचे बैठे बच्चों पर गिर सकता है। पालकों ने कहा कि बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है। जब तक बच्चा स्कूल से घर सकुशल नही आता तब तक चिंता रहती है। शासन प्रशासन शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए हर साल लाखों रुपये खर्चा करती परंतु ग्रामीण क्षेत्रो के स्कूल भवन का हाल खस्ताहाल है।

इस संबंध पर इरिकबुट्टा संकुल संन्यवयक मनोज शांडिल ने बताया कि जर्जर भवन की मरम्मत के लिए विधायक विक्रम उसेंडी मोहदय को आवेदन दिया गया है। उनके द्वारा जल्द ही निराकरण का अस्वाशन दिया गया है।

इस विषय पर कोयलीबेड़ा प्रभारी बीईओ देव कुमार सील ने बतलाया कि मैं अभी मीटिंग में हूं,सम्बंधित स्कूल के शिक्षक से जानकारी लेकर ही कुछ बता सकूँगा।

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