भोपालपटनम नगर अंधेरे के साये में; कई इलाकों की स्ट्रीट लाइट बंद

मुर्गेश रेड्डी-
भोपालपटनम। घोर नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले के अति संवेदनशील क्षेत्र में स्थित भोपालपटनम नगर पंचायत में इन दिनों अंधेरे के साये में है। नगर के कई प्रमुख इलाकों में स्ट्रीट लाइट लंबे समय से बंद पड़ी है। जिससे स्थानीय लोगों को रात के समय भारी असुविधा और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
नगर के फॉरेस्ट नाका से बीटीआई चौक और हनुमान चौक से चिकुटपल्ली अस्पताल रोड तक की कई स्ट्रीट लाइटें महीनों से बंद पड़ी हैं। हनुमान चौक से चिकुटपल्ली अस्पताल तक का रास्ता, जिसकी लंबाई लगभग 2 से 2.5 किलोमीटर है, घने जंगल क्षेत्र से होकर गुजरता है। इस मार्ग पर लाइट न रहने से रात में इलाका पूरी तरह अंधकारमय हो जाता है। नगर पंचायत क्षेत्र में आधा से ज्यादा स्ट्रीट लाइट बंद पड़ी हैं

बीमारों पर दोहरी मार
हनुमान चौक से चिकुटपल्ली अस्पताल मार्ग पर न तो कोई ऑटो सुविधा उपलब्ध है और न ही कोई सार्वजनिक परिवहन। जिन लोगों के पास निजी वाहन हैं, वे तो किसी तरह अस्पताल पहुंच जाते हैं, परंतु जिनके पास साधन नहीं है, उन्हें अंधेरे में पैदल चलना पड़ता है। यह स्थिति विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए अत्यंत असुरक्षित हो जाती है। बीमारों को यहां दोहरी मार झेलनी पड़ रही है

हर वार्ड में हालात एक जैसे
हमारे संवाददाता द्वारा शाम 7 बजे से 8 बजे के बीच नगर के विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान पाया गया कि लगभग सभी वार्डों में यही स्थिति बनी हुई है। कॉलेज रोड सहित अन्य प्रमुख सड़कों पर भी अंधेरा छाया हुआ है। नगर पंचायत के पार्षद अपने-अपने वार्डों की समस्याओं को हल करने में अब तक कोई प्रभावी पहल नहीं कर पाए हैं।

जनता ने उठाई आवाज
स्थानीय नागरिकों ने नगर पंचायत और जिला प्रशासन से मांग की है कि बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत कर उन्हें शीघ्र चालू किया जाए। लोगों का कहना है कि भोपालपटनम जैसे अति संवेदनशील क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी से दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। भोपालपटनम की जनता ने प्रशासन से मांग की रही है कि नगर की सभी स्ट्रीट लाइटें जल्द से जल्द चालू की जाएं, ताकि आमजन को राहत मिल सके और रात्रि में आवागमन सुरक्षित हो सके। नागरिकों का कहना है कि हमारे वार्ड में कई महीनों से लाइटें बंद हैं, कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। रात को बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं है।

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