श्रावण के चौथे सोमवार पर भोपालपटनम में भक्ति का अद्भुत उत्सव: शिव मंदिर से गूंजा ‘हर हर महादेव

भोपालपटनम :- 4 जुलाई बीजापुर जिले के भोपाल पटनम में श्रावण मास के चौथे सोमवार को बीजापुर नगर में आस्था, श्रद्धा और भक्ति की एक अनुपम झलक देखने को मिली। नगर के प्राचीन शिव मंदिर में आयोजित भव्य कांवड़ यात्रा ने श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति की गंगा बहा दी। यह आयोजन केवल धार्मिक परंपरा भर नहीं रहा, बल्कि सेवा, समर्पण और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बन गया।

सुबह की पहली किरण के साथ शुरू हुई आस्था की यात्रा
सुबह होते ही श्रद्धालुओं का सैलाब इंद्रावती नदी के तिमेड़ घाट पर उमड़ पड़ा। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां गंगा और भगवान शिव का विधिवत आह्वान किया गया। इसके पश्चात लगभग 500 कांवड़िए भगवा वस्त्रों और पुष्पों से सजी कांवड़ लेकर “हर हर महादेव” और “बम-बम भोले” के गगनभेदी जयघोष करते हुए नगर की ओर रवाना हुए।

महिलाओं की विशेष टोली बनी आस्था की मिसाल
इस बार की यात्रा में 200 श्रद्धालु महिलाएं भी सिर पर कलश लेकर शामिल हुईं। तीन किलोमीटर की यह पदयात्रा महिलाओं की निष्ठा, शक्ति और भक्ति का प्रतीक बनी।

रास्ते में पुष्पवर्षा, जलपान और स्वागत का विशेष प्रबंध
गोल्लगुड़ा के ग्रामीणों ने जगह-जगह श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा और जयघोष के साथ स्वागत किया। नगर पंचायत भोपालपटनम द्वारा यात्रा मार्ग में पेयजल व्यवस्था की गई थी, जिससे भक्तों को गर्मी से राहत मिली। पुलिस विभाग ने सुरक्षा की पूरी कमान संभाली, वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी सतर्क रहीं और डिहाइड्रेशन से प्रभावित कांवड़ियों को तत्परता से प्राथमिक उपचार दिया गया।

शिव मंदिर परिसर बना आस्था का केंद्र
नगर के प्राचीन शिव मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया था। फूलों, भगवा ध्वजों और पारंपरिक तोरणों से मंदिर परिसर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कोई तीर्थस्थल हो। शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। पूजन के बाद पुलिहारा का स्वादिष्ट प्रसाद वितरित किया गया, जिसे भक्तों ने बड़े श्रद्धा और प्रेम से ग्रहण किया।

2022 से लगातार बढ़ रही है भागीदारी
शिव मंदिर समिति के पदाधिकारीयो ने बताया कि यह पवित्र परंपरा वर्ष 2022 से प्रारंभ हुई थी और अब यह एक विशाल आयोजन का रूप ले चुकी है। उन्होंने कहा कि आज यह यात्रा हर वर्ग – बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग – सभी को जोड़ने वाली एक सामाजिक कड़ी बन गई है।

श्रावण का यह आयोजन बना सामाजिक एकता का प्रतीक
भोपालपटनम की इस कांवड़ यात्रा ने यह सिद्ध कर दिया कि जब आस्था, सेवा और समर्पण एक साथ चलते हैं, तो धार्मिक आयोजन सिर्फ पूजा नहीं रह जाते, बल्कि समाज को जोड़ने वाली प्रेरणा बन जाते हैं।

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