बने खाबो-बने रहिबो अभियान के तहत रवाना आठ चलित वाहनों में सात की हालात कंडम अफसरशाही हावी, निरीक्षण कम वसूली पर ध्यान ज्यादा
पीयूष मिश्रा एडिटर
रायपुर । छत्तीसगढ़ में त्योहारी सीजन को देखते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने बने खाबो-बने रहिबो के तहत आज 8 गाड़ियोंं को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। बता दें कि प्रदेश में 4 से 6 अगस्त तक खाद्य व औषधि प्रशासन विभाग द्वारा तीन दिनों तक खाने-पीने की चीजों की जांच करने के साथ लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, जिसके माध्यम से होटलों, रेस्टारेंट, मिठाई दुकान और स्ट्रीट वेंडर्स द्वारा तैयार किए जाने वाले खाद्य पदार्थों के सैंपल की आन-द-स्पॉट जांच की मंशा है। हर जिले में विभाग टीम मोबाइल लैब के साथ निकलेगी, सवाल यह है कि लोगों के स्वास्थ्य और जागरूकता से जुड़ें हावी हो चुके अफसरशाही के राज में कितनी सफल हो पाएगी। जानकारी हो कि एफएसएसएआई के दिशा निर्देशों पर पूरा देश खाद्य सुरक्षा के लिए काम करता है, छत्तीसगढ़ में इससे अछूता नहीं है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार और उनके मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है और एक अच्छी सोच के साथ जनता के स्वास्थ्य के प्रति उत्तरदायित्व निभाने की कोशिश कर रहे हैं। इस संदर्भ में उन्होंने तीन दिवसीय जांच एवं जागरूकता अभियान के रूप में स्पॉट चेकिंग आठ प्रयोगशाला चलित वाहन रवाना किया गया, जिसके माध्यम से होटलों, रेस्टारेंट, मिठाई दुकान और स्ट्रीट वेंडर्स द्वारा तैयार किए जाने वाले खाद्य पदार्थों के सैंपल की आन-द-स्पॉट जांच करने की मुहिम है, परन्तु हावी अफसरशाही शासन की एक अच्छी सोच को बिगाड़ने कोर-कसर नहीं छोड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार प्रयोगशाला चलित उक्त आठ वाहनों में सात की हालात कंडम है, इतना ही नहीं हाट- बाजार में गाड़ी खड़ी कर खाद्य सुरक्षा अधिकारी वसूली में लगे रहते हैं। गाड़ी के अंदर लगे स्वचालित यंत्र देखरेख के अभाव में खराब हो चुके हैं। एक वाहन की दशा ठीक भी भी है तो नागरिकों के अनुसार अभियान से जुड़े अफसर और कर्मचारियों का ध्यान खाद्य सामग्रियों के निरीक्षण पर कम वसूली पर अधिक रहता है, यहां यह बताना लाजिमी होगा की रमन सिंह की सरकार ने 2017 में 9 वाहनों को प्रदेश की बाजारों में उतारा था और कुल 22 वाहनों की स्वीकृति दी थी। अब आठ वर्षो बाद संचालित यह अभियान अफसरशाही के भेंट चढ़ने का खतरा मंडराने लगा है। ऐसे में यह सुनिश्चित कर पाना की 4 से 6 तारीख तक चलने वाले अभियान को गति मिल पाएगी या नहीं इस पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है
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