संविदा शिक्षकों की भर्ती में बड़ा घोटाला

डौंडी। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में संविदा पदों पर शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया अब सवालों के घेरे में आ गई है। भाजपा शासनकाल में शिक्षा जगत से जुड़े कुछ लोगों द्वारा शिक्षा के व्यवसायीकरण और उनके द्वारा भाई- भतीजावाद को बढ़ावा देने के आरोपों ने इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले में सबसे गंभीर आरोप चयन समिति के नोडल अधिकारी डीपी कोसरे पर लगे हैं, जिन्होंने अपनी ही पुत्री की नियुक्ति स्वामी आत्मानंद विद्यालय, घोठिया में व्याख्याता पद पर करवा दी ई है। उन्होंने नियमों की अनदेखी करते हुए अपनी ही पुत्री आकांशा कोसरे को व्याख्याता (सामाजिक विज्ञान) पद पर घोठिया आत्मानंद विद्यालय में नियुक्त करवा दिया है।मामला और गंभीर तब हो जाता है जब यह तथ्य सामने आता है कि कोसरे आरक्षित वर्ग से संबंधित हैं, मगर उनकी बेटी की अनारक्षित वर्ग की श्रेणी में नियुक्त किया गया है। जिससे प्रक्रिया में धांधली की आशंका और गहरी हो जाती है। जबकि शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, चयन समिति के किसी भी सदस्य के परिवारजन को भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जा सकता। और यदि ऐसा कोई संबंध है तो उसे पूर्व में शपथ पत्र देकर सूचना देना अनिवार्य होता है लेकिन डीपी कोसरे द्वारा ना तो ऐसी कोई सूचना दी गई न ही स्वयं को प्रक्रिया से अलग किया गया। जिससे यह संदेह मजबूत होता है कि नियोजन पूर्व नियोजित तरीके से हुआ। यह चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।

युक्तिकरण के नाम पर पक्षपात
बताया जाता है कि इस चयन प्रक्रिया में युक्तिकरण के तहत भी नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया गया है। कुछ योग्य अभ्यर्थियों को युक्तियुक्तकरण बताकर बाहर रखा गया। जबकि कई अपात्रों को जानबूझकर सूची में शामिल किया गया। इतना ही नहीं डीपी कोसरे की पत्नी को तो बाहर रखा गया लेकिन बेटी को नियुक्ति दे दी गई। जिससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पूरी तरह संदिग्ध हो गई है।

इंटरव्यू सूची में गड़बड़ी
बताया जा रहा है कि 8 सितंबर को इंटरव्यू के बाद सूची जारी होनी थी, लेकिन देर तक इसे टाल दिया गया। इस दौरान इंटरव्यू के दो से तीन सेट बदले जाने की बात सामने आई है, जिसे लेकर चयन प्रक्रिया में हेरफेर का अंदेशा जताया गया है। चयन समिति के कुछ सदस्यों पर अभ्यर्थियों के घर जाकर इंटरव्यू सीट बदलने के भी आरोप लगे हैं। पात्र अभ्यर्थी वंचित, बेरोजगारों ने लिस्ट रद्द करने की मांग की है। इस कथित गड़बड़ी से कई योग्य और पात्र उम्मीदवारों को बाहर कर दिया गया, जिसके चलते बेरोजगार युवाओं में भारी नाराजगी है। पीड़ित अभ्यर्थियों ने पूरी चयन सूची को रद्द कर पुनः निष्पक्ष प्रक्रिया से भर्ती की मांग की है। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया में लाखों रुपये की अवैध उगाही भी की गई है।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि अब तक कोई स्पष्ट जवाब या जांच की घोषणा नहीं की गई है। स्थानीय नागरिकों और अभ्यर्थियों ने मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और सूक्ष्म जांच की मांग की है ताकि दोषियों को चिन्हित कर कार्रवाई की जा सके।चयन समिति में शामिल अधिकारी अपने परिवार या रिश्तेदार को भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं कर सकते।
इंटरव्यू प्रक्रिया में पारदर्शिता और गोपनीयता अनिवार्य होती है। सरकारी भर्ती में लाभ का टकराव रोकने के लिए सख्त दिशानिर्देश हैं। मगर इन मापदंडों को दरकिनार कर दिया गया। इस संबंध में डीईओ से संपर्क करने की कोशिश की गई किंतु उनसे संपर्क नहीं हो सका

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