डीएवी स्कूल में बिखरी दीयों, रंगोली और फूलों की आभा
बकावंड। समूचा स्कूल परिसर दीयों की रौशनी, इंद्रधनुषी रंगोली की छटा और महकते फूलों की आभा से दमक उठा। उल्लास से भरे नजर आ रहे थे बच्चे और शिक्षक शिक्षिकाएं। अवसर था दीपावली का।
दीपावली का पर्व अंधकार पर प्रकाश, अन्याय पर न्याय और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। यह त्योहार रोशनी, सजावट, सौहार्द और समृद्धि का प्रतीक पर्व है, जो न केवल भारतवर्ष में बल्कि विश्वभर में अपार उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन धन और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी तथा धन के देवता भगवान कुबेर की विधि-विधान से पूजा की जाती है। घरों, दुकानों एवं गलियों को रंग-बिरंगे दीपों, झालरों और पुष्पमालाओं से सजाया जाता है। इसी क्रम में डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल ग्राम उलनार में दीपावली उत्सव का आयोजन प्राचार्य मनोज शंकर के मार्गदर्शन में बड़े ही हर्षोल्लास और पारंपरिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ। विद्यालय परिसर को दीपों, रंगोली और पुष्पों से सजाया गया था। पूरा वातावरण दिवाली की पावन आभा से आलोकित हो उठा। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रार्थना सभा से हुआ। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण की वेशभूषा में सजे विद्यार्थियों की पूजा-अर्चना के साथ दीप प्रज्ज्वलन किया गया। बच्चों ने भक्ति और संस्कृति का सुंदर संगम प्रस्तुत करते हुए विद्यालय के प्रांगण को भक्तिमय बना दिया। शिक्षिका मोनिका साहू ने मंच संचालन करते हुए सबको दीपावली की शुभकामनाएं दी। इसके बाद शिक्षिका मनीषा वर्मा एवं सुमन देवांगन के निर्देशन में कक्षा पहली और दूसरी के विद्यार्थियों ने दीपावली पर मनमोहक कविता प्रस्तुत की। बच्चों ने दीपों के माध्यम से आशा, ज्ञान और उजाले का संदेश दिया। कक्षा 11वीं की छात्रा निमिषा झाली ने अपने प्रभावशाली भाषण में दीपावली के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मज्ञान, सदाचार और सामूहिक एकता का संदेश देता है। उन्होंने पर्यावरण की दृष्टि से स्वच्छ और पटाखामुक्त दीपावली मनाने का भी संदेश दिया।

प्राचार्य मनोज शंकर ने सभा को संबोधित करते हुए सभी को दीपावली की शुभकामनाएं दीं और कहा कि दीपों का यह पर्व हमारे जीवन से अज्ञान का अंधकार मिटाकर ज्ञान, प्रेम और सद्भावना का प्रकाश फैलाए। इस अवसर पर 11वीं की छात्रा हंसिका ठाकुर ने सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता से मंच पर चार चांद लगा दिए। संगीत शिक्षक कृष्णकांत बर्मन के नेतृत्व में कक्षा बारहवीं, दसवीं और नवीं की छात्राओं ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक दिखाते हुए सुवा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिससे सारा विद्यालय प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
हुई विविध स्पर्धाएं
इसके बाद इंटर हाउस और खुली प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। जिसमें दीपक सज्जा, तोरण सज्जा और रंगोली प्रतियोगिता शामिल थीं। प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा की गई, जिसमें दीपक सज्जा में हीना भारती प्रथम, बिंदिया सेठिया द्वितीय और अभिषेक पाढ़ी तृतीय रहे। तोरण सज्जा प्रतियोगिता में श्रद्धानंद हाउस प्रथम, दयानंद हाउस द्वितीय, विरजानंद हाउस तृतीय और हंसराज हाउस चतुर्थ रहे। खुली रंगोली प्रतियोगिता में कृतिका समूह प्रथम, परमेश्वर समूह द्वितीय, गीता समूह तृतीय रहे। पूजा थाली सज्जा में प्राची जोशी प्रथम, नंदिनी द्वितीय और निर्जलेश्वरी तृतीय रहीं। सभी विद्यार्थियों ने बड़े ही रोचक ढंग से अपने कला को उभारा। कार्यक्रम में सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। पूरे विद्यालय परिसर में उल्लास और उमंग का वातावरण छा गया। दीपों की चमक और बच्चों के उत्साह ने इस पर्व को यादगार बना दिया।
