कभी गोलियों की गूंज, अब बच्चों के सपनों की आवाज

बीजापुर :- कभी नक्सल हिंसा और भय के साये में रहने वाला बीजापुर का सुदूर ग्राम कोण्डापल्ली अब विकास, शिक्षा और नई उम्मीदों की मिसाल बन रहा है। प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के तहत आज मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय जब कोण्डापल्ली के प्राथमिक शाला पहुंचे तो वहां का दृश्य बदलते बस्तर की नई तस्वीर बयां कर रहा था।

मुख्यमंत्री ने स्कूल का निरीक्षण कर बच्चों और शिक्षकों से आत्मीय बातचीत की। उन्हें बताया गया कि विद्यालय में वर्तमान में 56 छात्र अध्ययनरत हैं तथा 3 शिक्षक पदस्थ हैं।

मुख्यमंत्री ने बच्चों से पूछा, “स्कूल में यूनिफॉर्म, कॉपी-किताब और पेन मिल रहा है न?” इस पर बच्चों ने मुस्कुराते हुए एक स्वर में कहा, “हां सर, सब मिल रहा है।”

बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने एक छात्र से पूछा, “बड़े होकर क्या बनोगे?” नन्हे छात्र ने पूरे आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया, “डॉक्टर बनूंगा।” बच्चे का यह जवाब सुनकर मुख्यमंत्री ने उसकी पीठ थपथपाई और मन लगाकर पढ़ाई करने की प्रेरणा दी।

बदलते बस्तर की नई तस्वीर

कोण्डापल्ली जैसे गांव कभी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करते थे। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और संचार सुविधाओं का अभाव यहां के लोगों की बड़ी चुनौती थी। लेकिन आज हालात तेजी से बदल रहे हैं। गांव में स्कूल, आंगनबाड़ी, सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं, जिससे ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहा है।

डर नहीं, सपनों का भविष्य गढ़ रहा है बस्तर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि बस्तर के अंतिम गांव तक विकास और शिक्षा की रोशनी पहुंचे। उन्होंने कहा कि बच्चों के सपने ही विकसित और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की नींव हैं।

कोण्डापल्ली के इस छोटे से स्कूल में मुख्यमंत्री और बच्चों के बीच हुई यह बातचीत केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि उस बदलते बस्तर की कहानी थी, जहां कभी बंदूकों की गूंज सुनाई देती थी और आज बच्चों के सपने, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य की बातें सुनाई दे रही हैं।

कोण्डापल्ली का यह दृश्य स्पष्ट संदेश देता है— अब बस्तर भय से नहीं, शिक्षा, विकास और नई पीढ़ी के सपनों से पहचाना जाएगा।

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