उड़ीसा के लकड़ी माफियाओं ने मैलबेड़ा के जंगल में की बेतहाशा अवैध कटाई
-अर्जुन झा-
बकावंड। सरकार जहां “एक पेड़ मां के नाम” अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दे रही है और करोड़ों रुपए खर्च कर जंगलों में व्यापक वृक्षारोपण कराया जा रहा है, वहीं बकावंड ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत मैलबेड़ा के जंगल में धड़ल्ले से हो रही अवैध पेड़ कटाई ने इस अभियान की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार पिछले लगभग एक महीने से उड़ीसा से आए चार लोग जंगल में लगातार लकड़ी काटने का कार्य कर रहे थे। बताया जा रहा है कि इस अवैध कटाई के पीछे करपावंड और सोनपुर क्षेत्र के कुछ लोगों की भूमिका हो रही है। ये लोग जंगलों से कटी हुई और चिरान बनी लकड़ी निकलवाने का काम करा रहे थे। ग्रामीणों का आरोप है कि मामले की सूचना वन विभाग को दी गई, जिसके बाद विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और लकड़ी काटने में उपयोग किए जा रहे आरा को जप्त कर लिया। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि कथित रूप से कटाई में शामिल चार लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस कारण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक मोखागांव के एक व्यक्ति द्वारा वन विभाग के नाकेदार को सूचना भी दी गई थी कि उनके क्षेत्र में पेड़ों की कटाई का कार्य चल रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित व्यक्ति वन विभाग के कूद रेंज क्षेत्र में कार्यरत है। इसके बाद जंगल समिति के अध्यक्ष ने भी मामले की जानकारी संबंधित वन अधिकारियों को दी। बावजूद इसके, वन अधिनियम के तहत कोई कड़ी कार्रवाई सामने नहीं आने से ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम उठाए जाते तो जंगलों को हो रहे नुकसान को रोका जा सकता था। उनका आरोप है कि जंगल माफिया अब ग्रामीण क्षेत्रों में खुलेआम वन संपदा की तस्करी और अवैध कटाई का कार्य कर रहे हैं। कुछ ग्रामीणों ने मामले में विभागीय लापरवाही अथवा संभावित मिलीभगत की आशंका भी जताई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों ने उठाई कार्रवाई की मांग
एक ओर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर वृक्षारोपण अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर यदि जंगलों में हो रही अवैध कटाई पर प्रभावी रोक नहीं लगाई जाती, तो पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों की प्रभावशीलता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों ने प्रशासन एवं उच्च वन अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने, अवैध कटाई में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने तथा किसी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आने पर विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।ग्रामीणों का सवाल है कि यदि जंगलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाला विभाग ही कथित अवैध कटाई के मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं करेगा, तो वन संपदा की रक्षा कैसे होगी? आखिर सूचना मिलने और कार्रवाई के बाद भी संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की गई ? इन सवालों के जवाब और निष्पक्ष जांच की मांग अब तेज होती जा रही है।
करेंगे जवाब तलब
संबंधित विभाग से इस मामले की पूरी जानकारी प्राप्त कर, जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
–मनीष वर्मा,
एसडीएम, बकावंड
