गांव में नहीं है सड़क, मरीज को खाट पर लाद कर 7 किमी पैदल सफर
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। नक्सलवाद के खात्मे के बाद बस्तर भले ही तेजी से बदल रहा है, मगर संभाग में आज भी कई ऐसे गांव हैं, जहां पक्की सड़कें नहीं हैं। बारिश के मौसम में कच्ची सड़कें कीचड़ से सराबोर हो जाती हैं, नतीजतन वहां तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती। एंबुलेंस की जगह खाट का सहारा लेना पड़ता है। ऐसा ही एक वाकिया बस्तर संभाग के बीजापुर जिले से सामने आया है।
बीजापुर के उसूर ब्लॉक अंतर्गत रायगुड़ा गांव के गंभीर रूप से बीमार 22 वर्षीय युवक सावन मडकाम को खाट पर लाद कर 7 किमी पैदल चलते हुए एंबुलेंस तक लाना पड़ा। जानकारी अनुसार सावन मड़काम को अचानक आधी रात को सांस लेने में तकलीफ के कारण तबियत खराब होने लगी। परिंजनों ने 108 एंबुलेंस के लिए फोन लगाया, लेकिन बारिश के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाई। परिजनों, ईएमटी राजेश वल्पदास व पायलेट विनोद मंचराल ने सूझबूझ और साहस दिखाते हुए मरीज सावन मड़काम को खाट पर लादा और खाट को लेकर ग्राम पुसकोंटा तक 7 किमी लंबी चड़युक्त पगडंडीनुमा सड़क पर पैदल सफर तय कर मरीज को पक्की सड़क तक पहुंचाया। फिर मरीज को एंबुलेंस से बीजापुर अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया गया। ईएमटी राजेश वल्पदास ने बताया कि रायगुड़ा गांव के समीप नदी में पानी भरने व सड़क खराब होने से रात को टार्च के सहारे मरीज को जंगल रास्ते एंबुलेंस तक लाया गया जो बहुत कठिन काम था।
गांवों में सुविधाओं की कमी
बस्तर संभाग के ज्यादातर अंदरूनी गांव आज भी सड़क, बिजली, पानी,चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाओं के मोहताज हैं। माओवाद के कारण इनका रास्ता रोक रखा था। बीजापुर जिले के भी अधिकांश गांव सड़क के अभाव में बरसात के दौरान मुख्य मार्ग से कट जाते हैं। उसूर ब्लाक के कई गांव अभी भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। ग्रामीणों के अनुसार माओवादमुक्त क्षेत्र में विकास की सख्त जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग के उसूर बीएमओ से बात करने कोशिश की गई लेकिन बात नहीं हो पाई। उसूर के बीपीएम ने कहा 108 एंबुलेंस मरीज के संबंध में जानकारी नहीं है।
