दूसरे की जमीन पर दूसरी महिला को दे दिया सवा लाख का लोन!
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर जिले की जिला केंद्रीय बैंक की लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने एक किसान के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। इस किसान की जमीन पर एक दूसरी महिला को बैंक ने लोन दे दिया है और इसका खामियाजा जमीन मालिक किसान को भुगतना पड़ रहा है।
बस्तर जिले की नानगुर तहसील की ग्राम पंचायत बड़ेमुरमा में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखा द्वारा बरती गई बड़ी लापरवाही के कारण एक किसान परिवार की पैतृक जमीन पर फर्जी कृषि ऋण दर्ज होने का मामला सामने आया है। कोर्ट के आदेश के बाद भी राजस्व रिकॉर्ड नहीं सुधरने से पीड़ित परिवार को सरकारी योजनाओं से वंचित होना पड़ रहा है।ग्राम मुरमा निवासी जानकी बाई, तुलावती, सत्यनारायण और बलराम पिता स्व. शीतल राम ग्राम छोटे मुरमा में स्थित खसरा नंबर 128, 174, 176, 221 रकबा 4.68 हेक्टेयर जमीन के संयुक्त भू-स्वामी हैं। पीड़ितों के अनुसार इस जमीन से संबंधित विवाद में न्यायालय का निर्णय भी उनके पक्ष में आया है।इनका आरोप है कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, जगदलपुर ने उक्त भूमि को बंधक मानते हुए बिना अन्य सह स्वामियों की जानकारी और सहमति के सुलोचना पिता झितरू, निवासी छोटे मुरमा को वर्ष 2025-26 में 1 लाख 23 हजार 4 रुपए का केसीसी ऋण स्वीकृत कर दिया। वर्तमान में यह ऋण कालातीत हो चुका है।लोन राजस्व अभिलेखों में दर्ज होने के कारण अब असली भू-स्वामी बलराम को नया कृषि ऋण नहीं मिल पा रहा है और न ही उन्हें शासन की किसान हितैषी योजनाओं का लाभ मिल पा रहा है। वहीं समिति के अनुसार तहसीलदार जगदलपुर के आदेश क्रमांक 272/नायब तहसीलदार स्थगन दिनांक 22 जून 2021 के आधार पर उक्त भूमि का कब्जा सुलोचना पिता झितरू को सौंपा गया था। इसी कारण अन्य साझेदारों की सहमति के बिना ऋण स्वीकृत किया गया। पत्र में यह भी कहा गया है कि ऋण वसूली के लिए सुलोचना को नोटिस जारी किया जा चुका है।
कलेक्टर से की मांग
पीड़ित परिवार ने बीते 10 जुलाई को बस्तर कलेक्टर जगदलपुर को लिखित आवेदन सौंपा। इसमें मांग की गई है कि राजस्व अभिलेखों से उनकी जमीन पर दर्ज अवैध लोन को तत्काल हटाया जाए, पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, उन्हें नया कृषि ऋण और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए।आवेदन की प्रति तहसीलदार नानगुर और संबंधित बैंक शाखा को भी दी गई है। पीड़ित किसान परिवार का कहना है कि जब कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में है, तो बैंक ने एकतरफा लोन कैसे दे दिया? हमारी जमीन पर कर्ज चढ़ने से हम बर्बाद हो गए हैं। हमें शासन से न्याय की उम्मीद है।
