जेल की दीवारें भी नहीं तोड़ पाईं दो दिलों के बंधन को
जगदलपुर। जिस प्रेमिका से दुष्कर्म के आरोप में एक प्रेमी बीते छह माह से जेल में बंद है, वही प्रेमिका आख़िरकार उसकी जीवनसंगिनी बन गई। मजे की बात यह कि दोनों की शादी जेल की चारदीवारी के पीछे हुई। इसके साक्षी बने जेलकर्मी और कुछ वकील।

यह अनूठा, मगर दिल को छू लेने वाला मामला सामने आया है सेंट्रल जेल जगदलपुर से। जेल में बंद एक विचाराधीन बंदी व उसकी प्रेमिका ने जेल परिसर के भीतर में आज सात फेरे लिए। दरअसल युवक- युवती के बीच लंबे समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों के इस रिश्ते से युवती के परिजन नाराज थे। उन्होंने युवक के खिलाफ पुलिस में दुष्कर्म का केस दर्ज करा रखा है। इसी मामले में युवक बुधराम सेठिया पिछले छह माह से सेंट्रल जेल में बंद है। जेल अभिरक्षा के कड़े पहरे में विचाराधीन बंदी बुधराम सेठिया और उसकी प्रेमिका मनवती कश्यप का आज पूरे रस्मो रिवाज के बीच विवाह हुआ। दोनों के विवाह के साक्षी बने जेल अधिकारी, अधिवक्ता और समाजसेवी। दरअसल बुधराम का मनवती कश्यप के साथ पहले से ही प्रेम संबंध था, जिससे नाराज युवती के परिजनों ने मुकदमा दर्ज करवा दिया था। इस बीच मनवती लगातार बुधराम से मिलने जेल आती रही।
कानूनी अड़चनों के बावजूद मनवती ने अपने प्रेमी का साथ नहीं छोड़ा। न्यायालय में पेशी के दौरान जब मामला सामने आया, तब दोनों ने न्यायाधीश के समक्ष शादी करने की गुहार लगाई। मामले की संवेदनशीलता और दोनों की इच्छा को ध्यान में रखते हुए न्यायाधीश ने जेल अभिरक्षा के भीतर ही विवाह संपन्न कराने की विशेष अनुमति प्रदान कर दी
जेल प्रशासन ने दिया साथ
जेल में खट रहे बंदी बुधराम की शादी में जब परिजनों ने दूरी बनाई, तो वकीलों और जेल पुलिस ने आगे आकर विवाह के गवाह बनने की जिम्मेदारी निभाई। इस विवाह के मार्ग में केवल कानूनी ही नहीं, बल्कि सामाजिक चुनौतियां भी खड़ी थीं।मनवती के आदिवासी समुदाय से होने के कारण बुधराम के परिवार वाले इस अंतरजातीय या सामाजिक विवाह के सख्त खिलाफ थे। परिवारजनों व समाज में भारी नाराजगी देखने को मिली। बुधराम ने इसकी परवाह नहीं की। बुधराम
के परिवार की अनुपस्थिति के बावजूद, विवाह कार्यक्रम में लड़की पक्ष के परिजन, जेल पुलिस बल और बड़ी संख्या में वकील शामिल हुए।
