छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण विभाग में बिचौलिया प्रथा
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। शासन की प्रमुख निर्माण एजेंसी लोक निर्माण विभाग में अब बिचौलिया प्रथा हावी हो गई है। विभाग के अधिकारी निर्माण कार्य की जिम्मेदारी से खुद को बचाते हुए बिचौलिये के माध्यम से कार्यों का निपटारा कर रहे हैं। यह तथाकथित बिचौलिया बेवजह ठेकेदारों के कार्यों में अड़ंगे डाल रहा है।
बस्तर संभाग स्थित लोक निर्माण विभाग के कांकेर मंडल में बिचौलिये की गतिविधि काफी बढ़ गई है। कांकेर मंडल के अंतर्गत नारायणपुर जिले में कार्यरत ठेकेदार विभाग में हावी बिचौलिया प्रथा से बेहद परेशान हैं। पीड़ित ठेकेदारों का कहना है कि अधीक्षण अभियंता श्री सूर्यवंशी की बिचौलिया रखने की नीति से वह काफी परेशान हैं। कोई मीणा नामक व्यक्ति जो श्री सूर्यवंशी का खास मुंह लगा है वह नारायणपुर जिले में कार्यरत ठेकेदारों के बीच सक्रिय होकर अपनी मनमानी करते हुए ठेकेदारों से अधीक्षण अभियंता के नाम पर रंगदारी वसूली करता है। रंगदारी नहीं देने पर निपटा देने की बात कही जाती है। इस बात की पुष्टि तब हुई जब रूरल रोड प्रोजेक्ट में कार्यरत ठेकेदारों ने बिचौलिये की बात मानने से इंकार कर दिया। नतीजतन कई ठेकेदारों को अधीक्षण अभियंता श्री सूर्यवंशी के कोप भाजन का शिकार होना पड़ा। आज भी उक्त मीणा नामक दलाल के माध्यम से ही पूरे मंडल स्तर पर वसूली अभियान चलाया जा रहा है। इस पूरे इलाके में “सूर्यवंशी टैक्स” मीणा दलाल के माध्यम से वसूले जाने की बात जग जाहिर हो चुकी है।हालांकि इसकी शिकायत पीएम हाउस से लेकर मुख्यमंत्री तक की गई है। इसके बाद भी दलाल के माध्यम से टेंडर निकालने से लेकर अपने चहेतों को काम दिलाने की प्रक्रिया बदस्तूर चल रही है। लोगो का कहना है कि अब नक्सलमुक्त बस्तर में नए परदेसी द्वारा विभाग के अधिकारी का चहेता बन कर ठेकेदारों को लूटने का काम किया जा रहा है।
पेटी कांट्रेक्टर को भुगतान?
रूरल रोड प्रोजेक्ट-2 के तहत नारायणपुर और कोंडागांव जिले में स्वीकृत एवं बिल्डिंग निर्माण के टेंडर दक्षिण भारत के एक फर्म को दिया गया है। टेंडर मंजूर हुए 4 वर्ष से भी अधिक समय बीत चुका है, मगर इस फर्म ने अब तक 5 प्रतिशत भी काम नहीं कराया है। इसके बावजूद इस फर्म के खिलाफ आज तक न तो कोई कार्रवाई की गई है और न ही उसके ठेके निरस्त किए गए हैं। कहा जाता है कि कथित मीणा सरनेम वाला व्यक्ति को दक्षिण भारत के उक्त ठेका फर्म ने सबलेटिंग किया है। यह व्यक्ति खुलेआम कहता है कि कांकेर मंडल के अधीक्षण अभियंता संजय सूर्यवंशी से उसकी सेटिंग है। यह जांच का विषय है कि जब निविदा शासन द्वारा दक्षिण भारत के रजिस्टर्ड फार्म को दिया गया है तो उसके बिलों का भुगतान लेने मीणा कार्यालय के चक्कर क्यों लगाता है, वह करोडो के बिलों का भुगतान भी वह कैसे ले चुका है? किस हैसियत से उसे साऊथ के फर्म ने सबलेन्ट कॉन्ट्रेक्टर बनाकर कैसे दिया गया है। इस व्यक्ति द्वारा मेजरमेन्ट बुक मे साईन भी किस अधिकार करवाया जाता है। शुरू से अब तक नारायणपुर, कोंडागांव और बस्तर जिलों जिलों मे आरआरपी-2 और एलडब्ल्यूई योजना के करोड़ों के कार्य करवाए जा रहे हैं।
