किंजोली पंचायत में 25वें वित्त मद की राशि के वारे न्यारे, सरपंच पति के खाते में लाखों ट्रांसफर
-अर्जुन झा-
बकावंड। विकासखंड बकावंड की ग्राम पंचायत किंजोली में 15वें वित्त आयोग के तहत वर्ष 2025-26 में स्वीकृत कार्यों में कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सड़क निर्माण, बोर खनन, रनिंग वाटर सिस्टम और अन्य कार्यों के नाम पर स्वीकृत राशि में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है। पंचायत राज अधिनियम को ठेंगा दिखाते हुए कई कार्यों की भुगतान राशि सरपंच पति प्रकाश कश्यप के खाते में ट्रांसफर कर दी गई है। आरोप तो यह भी है कि किंजोली की सरपंच महज रबर स्टैंप हैं, ग्राम पंचायत का सारा उचित अनुचित काम सरपंच पति निपटाते हैं और इसमें सचिव भी उन्हें खुलकर सहयोग करते हैं।
बताया जा रहा है कि 12 अक्टूबर 2025 को सरपंच पति प्रकाश कश्यप के नाम पर लगभग 2 लाख 45 हजार रुपये की राशि आहरित की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत के अधिकांश कार्यों का संचालन सरपंच के स्थान पर उनके पति द्वारा किया जाता है, जबकि पंचायत की राशि परिवार के सदस्य के नाम पर आहरित करना पंचायत राज अधिनियम के विरुद्ध है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में व्यापक वित्तीय अनियमितता की गई है और पंचायत में योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। वहीं दूसरी ओर पंचायत में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े कार्यों में भी गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 4 आवास पारा में बोर खनन के नाम पर नरेश बोरवेल को लगभग 1 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्र पुजारी पारा में भी बोर खनन के लिए नरेश बोरवेल के नाम पर लगभग 1 लाख रुपये का भुगतान करना बताया जा रहा है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि दोनों स्थानों पर जमीन पर बोर खनन का कोई नामों निशान नहीं है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत में योजनाओं की राशि का सही उपयोग नहीं किया गया और इस मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वास्तव में कार्य नहीं हुए हैं तो यह सरकारी राशि के दुरुपयोग का गंभीर मामला है। ऐसे में पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मामले में जनपद पंचायत सीईओ क्या संज्ञान लेते हैं और क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराते हैं या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह अनदेखा रह जाता है?
