बस्तर में माटी पुजारी की उपाधि पर विवाद
जगदलपुर। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के समापन के बाद अब माटी पुजारी की उपाधि को लेकर चर्चा तेज हो गई है। बस्तर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में विशेष स्थान रखने वाले माटी पुजारी को लेकर अलग-अलग दावे सामने आने से इस मसले ने नया मोड़ ले लिया है। एक ओर बस्तर राज परिवार के कमलचंद्र भंजदेव स्वयं को मां दंतेश्वरी का माटी पुजारी बताते हैं, तो वहीं दूसरी ओर आदिवासी समाज के संरक्षक बलदेव मौर्य ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए स्पष्ट शब्दों में असहमति जताई है।
बलदेव मौर्य का कहना है कि माटी पुजारी की परंपरा का संबंध बस्तर के ऐतिहासिक और पारंपरिक धार्मिक दायित्वों से है। उनके अनुसार, रुद्र प्रताप देव ही माटी पुजारी थे और उनके बाद किसी अन्य को इस उपाधि का अधिकार नहीं मिला। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार में जन्म लेने वाले बेटे-बेटियों अथवा घर जमाई होने मात्र से ही किसी को माटी पुजारी का दर्जा नहीं दिया जा सकता। यह एक विशिष्ट परंपरा और अलग पहचान से जुड़ा विषय है।
राजपरिवार के दावे से उठा मुद्दा
दूसरी ओर, बस्तर राजपरिवार के कमलचंद्र भंजदेव स्वयं को मां दंतेश्वरी का माटी पुजारी बताते हैं। इसी दावे को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर माटी पुजारी की उपाधि का आधार क्या है और इस परंपरा को निर्धारित करने का अधिकार किसे है? क्या यह उपाधि वंश परंपरा से जुड़ी है, किसी विशिष्ट धार्मिक दायित्व से अथवा ऐतिहासिक मान्यता से? इन सवालों ने बस्तर की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं पर नई बहस छेड़ दी है। बस्तर में माटी पुजारी का विषय केवल किसी व्यक्ति की उपाधि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय इतिहास, धार्मिक आस्था और पारंपरिक व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस विषय पर अलग-अलग मत सामने आना स्वाभाविक है, लेकिन किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए ऐतिहासिक दस्तावेजों, परंपरागत मान्यताओं और संबंधित समाज के पक्ष को समझना आवश्यक होगा।
भविष्य पर निगाहें
बस्तर दशहरा जहां विभिन्न समाजों, देवी-देवताओं और परंपराओं की सामूहिक भागीदारी का प्रतीक है, वहीं इसके समापन के बाद माटी पुजारी की उपाधि को लेकर उठे सवाल एक बार फिर बस्तर की सांस्कृतिक विरासत की व्याख्या और उसके संरक्षण पर विमर्श को सामने ला रहे हैं। अब देखना यह होगा कि माटी पुजारी की परंपरा को लेकर उठे इन सवालों पर ऐतिहासिक प्रमाणों और पारंपरिक मान्यताओं के आधार पर कोई स्पष्ट स्थिति सामने आती है या यह बहस आने वाले दिनों में और गहराती है।
