दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग उपकरण प्रदाय से आया जीवन में बदलाव

बीजापुर : – स्पंदन ही चेतना है और प्रगतिशीलता ही कार्यकुशलता का प्रमाण है। ऐसे ही सत्य जीवन की अवधारणाओं से फलीभूत मानव जीवन श्रृंखलाबद्ध रूप से नये समाज एवं उपलब्धियों को प्राप्त करने के लिए अग्रसर होता है, सामाजिक समताओं को अंगीकृत करते हुए मानव जीवन नित् नये आयामों को प्राप्त कर रहा है, ऐसी ही एक कड़ी जो किंचित कारणों से सम्पूर्ण जीवन में किन्ही एक या एक से अधिक शारीरिक रचना में न्यूनता होने के कारण से व उम्र के एक ऐसे पड़ाव को प्राप्त करने के पश्चात जब मानव कार्य करने में अक्षम व स्वयं को असहाय महसूस करता है एवं समाज के मुख्यधारा से कट जातें हैं उनकी सहायता के लिए समाज कल्याण विभाग के कुशल नेतृत्व में संचालित विभागीय योजनाओं के माध्यम से सहायक अंग यथा कृत्रिम अंग उपकरण योजना के माध्यम से जिले के दिव्यांगजनों को उनकी दिव्यांगता के अनुरूप सहायक उपकरण यथा कृत्रिम अंग वितरित कर उनके जीवन स्तर में सुधार एवं मुख्य धारा से जोड़ने हेतु प्रयास किये जा रहे हैं। इसी सकारात्मक प्रयासों की दिशा में दिव्यांगजनों की कल्याणकारी योजनांतर्गत् सहायक अंग यथा कृत्रिम अंग उपकरण प्रदाय योजना के माध्यम से विगत छः माह में जिले के भिन्न-भिन्न ग्राम पंचायतों में क्लस्टर स्तरीय 4 शिविरों का आयोजन कर शिविरों में चिन्हांकित हितग्राहियों को उनके आवश्यकतानुसार सहायक अंग यथा कृत्रिम अंग उपकरण प्रदाय किया गया है, जिसमें 30 नग ट्रायसायकल, 4 नग व्हीकल चेयर 28 नग श्रवण यंत्र, 14 नग वाकिंग स्टिक, 11 नग फोल्डेबल वाकर, 6 नग ब्लाइंट स्टिक एवं 49 नग बैसाखी प्रदाय किया जा चुका है। इन्हीं दिव्यांग हितग्राहियों में से एक ऐसे अस्थि बाधित दिव्यांग बंधु मिड़ते निवासी श्री आयतु कुम्मा जिन्हें अपने घर से बाहर जाने एवं रोजमर्रा के कार्यकलाप हेतु आने-जाने में अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता था और स्वयं को असहाय महसूस करते थे। उन्हें समाज कल्याण विभाग की पहल से हस्त चलित ट्रायसाईकिल की सहायता दी गयी जिससे उनके जीवन में काफी बदलाव आया है। अब आयतु कुम्मा रोजमर्रा के क्रियाकलापों हेतु आसानी से कहीं पर भी आना-जाना कर पा रहें हैं तथा परिवार व समाज में अपना अमूल्य योगदान दे रहें हैं।

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