कांग्रेस ने छीना पी. एम.आवास गरीब खुली छत पर रहने को मजबूर – नंदलाल मुड़ामी।
दन्तेवाड़ा :- इन दिनों क्षेत्र में हो रही बरसात से जन जीवन अस्त-व्यस्त है नदी नाले उफान पर है, इन स्थितियों के चलते भाजपा अजजा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री नंदलाल मुड़ामी ने बरसात में दंतेवाड़ा जिला के कुआकोंडा क्षेत्र का भ्रमण कर वहां के पीड़ित परिवारो से मिलकर उनका हाल-चाल जानने की कोशिश की। इस दौरान उन्हें ऐसे कई परिवार मिले जिनका प्रधानमंत्री आवास तो लगभग 4 साल पहले स्वीकृत हुआ है लेकिन वो सारे अधूरे ही बन पाए हैं।

ऐसा ही एक गरीब परिवार फुलपाड ग्राम पंचायत के सुक्का का है जिनके नाम से प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ था, इसी बीच सुक्का का स्वर्गवास हो गया
पूरा परिवार अनाथ हो गया स्व. सुक्का अपने पीछे विधवा पत्नी, 5 छोटे-छोटे बच्चे ,बूढ़ी माँ को अनाथ छोड़ गए। इस गरीब आदिवासी परिवार का आवास अपूर्ण होने की वजह से भरी बरसात में रात काटना मुश्किल हो रहा है। उन्हें कच्ची मिट्टी के खपरेल घर की टपकते छत में रातभर जाग जागकर जीवन बिताने को मजबूर होना पड़ रहा है। घर का रखा हुआ धान,और कपड़े भी भीग जाते हैं । ऐसे ही एक परिवार ग्राम पंचायत पालनार के बामन पिता कुंमा को पक्का मकान स्वीकृत हुआ है लेकिन वो भी अधूरा होने के कारण उन्हें इसी तरह परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पक्का मकान नही बन पाने के कारण ऐसे कई परिवारों को भीगी गीली जमीन में सोने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

ग्राम पंचायत महारहुनार ग्राम पेंटा के निवासी सिमो कोररी पति सोमरु के 2 बच्चे सहित 4 लोगों के परिवार की स्थिति भी परेशानियों से भरी हुई है।उनका प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ तो है पर प्लिंथ लेबल तक ही बन पाया है। वही गडमीरी के मड्डा पिता वारे के परिवार का भी यही हाल है। मुड़ामी ने कहा कि,सुक्का, बामन ,सिमो, मड्डा जैसे प्रदेश में ऐसे अनेको परिवार तकलीफदेह जीवन जीने को मजबूर है । केंद्र की मोदी सरकार ने तो सभी गरीब परिवारों के लिए पक्के मकान का पूरा पैसा छत्तीसगढ़ को भेजा है, मगर भूपेश सरकार की राजनीतिक दुर्भावना के कारण छत्तीसगढ़ की गरीब जनता को उनका हक, उनकी पक्की छत नही मिल पा रही है। आज गरीब आदिवासी भरी बरसात में सिसक सिसक कर रात बिताने को मजबूर है, भोली भाली बस्तर की जनता ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में कांग्रेस के 12 में से 12 विधायक चुनकर भेजा है। लेकिन गरीब आदिवासियों का हालचाल जानने के लिए, उनके मकान की क्या स्थिति है,कोई सुनने वाला नजर नहीं आता है। मैं स्थानीय विधायक एवं सांसद से मांग करता हूं कि एक बार अपने क्षेत्र के दौरे पर निकले और देखें की इस तरह की बरसात में टपकते हुए कच्चे मकान में रात दिन बिताना, संघर्ष कर के बच्चों को खाना खिलाना दैनिक उपयोग की वस्तुओं को बचाना कितना कठिन है। यदि गरीबों के प्रति जरा भी संवेदना हैं तो मुख्यमंत्री भुपेश बघेल जी के पास जाइए,और जो मोदी जी के द्वारा केंद्र सरकार से आया हुआ प्रधानमंत्री आवास
कांग्रेस के सरकार में लटका हुआ है, उसको वहां से लाकर धरातल पर उतारें और गरीबों को पक्की छत दिलाने में मदद करें।
छत्तीसगढ़ कैबिनेट के प्रमुख मंत्री टीएस सिंह देव ने स्पष्ट कहा है कि हमने लगभग 4 सालों के शासन में एक भी आवास पूर्ण नहीं किया है। आज की स्थिति में 16 लाख मकान अधूरे पड़े हैं या चालू ही नहीं हुए हैं।भूपेश सरकार ने छत्तीसगढ़ की जनता से,उनके सर से, सोलह लाख पक्की छतों को छीनने का जो काम किया है,
वह घोर निंदनीय है। इस भ्रमण के दौरान ग्राम पंचायत पालनार के सरपंच सुकालू मुड़ामी, महराहुरनार सरपंच सोनी कश्यप, फूलपाड के सरपंच भुमिका मंडावी ,गडमीरी सरपंच सोनी कोर्राम,कोरीरास सरपंच सुनील मंडावी, मालती मुड़ामी जिला पंचायत सदस्य , पायके मरकाम जिला पंचायत सदस्य ,जनपद सदस्य भीमा कवासी सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।
