मानसून की सक्रियता से क्षेत्र के किसानों के खिले चेहरे
राजदीप शर्मा
छोटे कापसी। पखांजूर तहसील (परलकोट क्षेत्र) में मानसून की सक्रियता से किसानों को राहत मिली है। लंबे इंतजार के बाद हुई मानसुनी बारिश ने खेतों को तर कर दिया है। इससे धान की रोपाई तेजी से शुरू हो गई है।
बांदे भाजपा मंडल उपाध्यक्ष उत्तम बनिक ने बताया की परलकोट के किसान युद्ध स्तर पर रोपाई में जुटे हैं। सुबह होते ही गांवों में हलचल शुरू हो जा रही है। किसान और खेतिहर मजदूर अपने औजार लेकर खेतों की ओर निकल पड़े हैं। गीली मिट्टी और खेतों में भरे पानी के बीच किसान पूरे उत्साह से धान रोपाई का काम कर रहे हैं।
खेतों में सुबह से शाम तक किसानों की टोलियां काम करती दिखाई दे रही हैं। महिलाएं, पुरुष और युवा सभी इस काम में जुटे हैं। हरियाली और लोगों की चहल-पहल से गांवों में रौनक लौट आई है।
धान की खेती मानसून पर निर्भर होने के नाते जून माह के पहले हप्ते में मानसुनी बारिश समय से नहीं होने से किसान चिंतित थे। लेकिन जून माह के अंत सप्ताह में हुई मानसून बारिश ने किसानों को राहत दी, किसानो के चेहरे खिले है।
मजदूरों की उपलब्धता और समय पर संसाधनों की व्यवस्था से किसानों को सहूलियत मिल रही है। मानसून की सक्रियता से गांवों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। पखांजूर सत्यानंद पल्ली निवासी विदु विस्वास ने बताया कि अब सभी की उम्मीदें इस बात पर टिकी हैं कि मौसम अनुकूल बना रहे और फसल अच्छी हो।
कापसी क्षेत्र के किसान विमल देवव्रत मंडल विधान मंडल रंजीत राय आदि ने बताया इन दिनों खेतों में रोपाई का काम चल रहा है।
अब किसान खेती के परंपरागत साधनों को छोड़कर तेजी से आधुनिक साधनों की ओर बढ़ रहे हैं। इन साधनों में ट्रैक्टर,पानी की मोटर, आधुनिक बीज व कृषि उपकरण शामिल हैं। इन दिनों खेत रोपाई करने के पहले खेत में कीचड़ करने होता है जिसके कारण ट्रैक्टर की मांग भी तेज हो गई है। वे कृषक जिनके घर में ट्रैक्टर हैं, पहले अपने खेतों की जुताई, रोपाई कीचड़ कर आसपास के फलियों व कस्बों में किराए से ट्रैक्टर दे रहे हैं। इन दिनों जुताई का काम चल रहा है। खेतों में जुताई के लिए ट्रैक्टर का रेट 800 रुपए प्रति घंटा चल रहा है। और एक रोडो मेटर ट्रैक्टर भी खेती की जुताई मे उपयोगी है जिसका घण्टा 12 सौ रुपये लिया जा रहा है। ऐसे में किसानों को ज्यादा कीमत पर लेना पड़ रहा है।
परलकोट में खाद की किल्लत से किसान परेशान
किसान ने नाम न छापने की शर्त पर बताया की परलकोट क्षेत्र में डीएपी खाद की कालाबाजारी जोरो पर चल रही है,गांव-गांव क्षेत्र में दुकानदार कर रहे मनमानी सरकारी कीमत से दोगुना कीमत पर किसानों को बेचा जा रहा डीएपी खाद,खरीदने को मजबूर किसान,जिम्मेदार अधिकारी मौन,परलकोट क्षेत्र में कई खाद दुकानें बिना परमिशन के भी चल रहे हैं पर विभाग को जानकारी होते हुए भी कार्यवाही के नाम पर सिर्फ लीपापोती। उन्होंने बताया कि बारिश की वजह से जहा किसानों के चेहरे खिले तो वही दूसरी ओर किसानों को डीएपी खाद नही मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है, किसानों की माने तो ग्रामीण क्षेत्र में कुछ दलाल और बांदे क्षेत्र के गल्ला आंध्र मक्का बेचते है और वापसी में महाराष्ट्र से डीएपी खाद लेकर आता और किसानों को अधिक दामो पर चोरी छुपे रात को गाँव में पहुँचा कर देते है किसान को मजबूरी में अधिक दामो पर खाद लेना पड़ा रहा है। जिसका खामियाजा परलकोट क्षेत्र के भोले भाले गरीब किसानों को भुगतना पड़ रहा है। वे लेम्पस के समितियां से लोन लेकर हर साल फ़सल लगते है लेकिन इस साल किसानों को लेम्पस से पर्याप्त मात्रा में खाद नही मिलने से पारेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस किल्लत के चलते उनकी फसलें समय पर नहीं लग पा रही हैं। शासन प्रशासन को किसान की ज्वलंत सील समस्या के प्रति ध्यान देना चाहिए।
