लैम्पस बड़े कापसी प्रभारी प्रबंधक निलंबित, करोड़ों रुपये के हाई ब्रीड बीज वितरण घोटाले मामले की जांच में पाए गए दोषी
घोटाले में संलिप्त चार ऑडिटरों पर कार्यवाही अब तक नही
छोटे कापसी(राजदीप शर्मा) – करोड़ों रुपये के हाइब्रिड बीज वितरण घोटाले मामला जब विधानसभा में गूंज उठी तो संलिप्त प्रभारी प्रबंधक पार्थ देवनाथ को हाइब्रिड बीज वितरण के मामले में दोषी पाए जाने के कारण निलंबित कर दिया गया है। संयुक्त पंजीयक जगदलपुर के आदेश क्रमांक / शिकायत/लैम्पस /जाँच/2022/145 जगदलपुर दिनांक- 11/03/2022 के अनुसार पार्थ देवनाथ तत्कालीन प्रभारी प्रबंधक द्वारा पंजीयक सहकारी संस्थाऐ छ.ग. रायपुर के ज्ञापन क्रमांक/ विपणन/2015/3282 रायपुर दिनांक – 04 /07 /2015 से प्रसारित निर्देश के विरुद्ध विपणन संघ बीज निगम से वस्तु प्राप्त नहीं किया, जाकर अनाधिकृत एजेंसी से 1,56,84,230( एक करोड़ छप्पन लाख चौरासी हजार दो सौ तीस रुपये) का बीज प्राप्त कर केंद्र शासन से 296265.96 रुपये एवं राज्य शासन से 822686.85 रुपये कुल राशि 11,18,952.81 रुपये ब्याज अनुदान के रूप में फर्जी तरीके से प्राप्त किया गया है। जो नियम के विरुद्ध है, प्रकरण अंतर्गत अंतरिम जांच प्रतिवेदन संयुक्त पंजीयक जगदलपुर को प्रस्तुत करने वाले जांच अधिकारी राजेश मंडावी वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक कार्यालय संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाऐ जगदलपुर, महेश मरकाम वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक कार्यालय उप पंजीयक कांकेर एवं एस.एल. दुग्गे सहायक पंजीयक कांकेर ने अपने सात बिंदुओं से केवल तीन बिंदुओं पर जांच कर जांच प्रतिवेदन संयुक्त पंजीयक जगदलपुर को प्रस्तुत किया जिसमें एक बिंदु यह भी है, प्रभारी प्रबंधक पार्थ देवनाथ द्वारा केवल अपना वेतन वृद्धि नियम के विरुद्ध में किया, जांच में पाया गया है। जो ब्याज अनुदान की राशि कृषकों से लेना था कृषकों से ना लेकर शासन से लिया गया है। संचालक मंडल की बैठक दिनांक- 11/03/ 2022 में प्रस्ताव क्रमांक 01 से लिया गया निर्णय अनुसार पार्थ देवनाथ को लैम्पस सेवा नियमों के प्रावधान अनुसार अपने पत्र क्रमांक/स्था0/48/2021-2022/लैम्पस बड़ेकापसी/ दिनांक- 11/03/2022 को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। ज्ञात हो कि समिति एवं संयुक्त पंजीयक ने प्रभारी लैम्पस प्रबंधक को दोषी मानते हुए निलबित किया, परंतु उनके ऑडिटरो एवं बैंक अधिकारियो पर अभी तक किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की जबकि सबसे बड़ा दोषी तो ऑडिटर एवं बैंक के अधिकारी है, जो शासन के कर्मचारी होते हैं।
