खनिज अधिकारियों ने आंखों पर पट्टी बांध कर की अवैध रेत भंडारण की जांच


-अर्जुन झा-
बकावंड। करपावंड तहसील के छिंदगांव में खनिज विभाग द्वारा रेत भंडारण पर की गई कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि जहां एक हजार ट्रॉली से ज्यादा रेत डंप थी, वहां खनिज विभाग की टीम को महज 200 ट्रॉली रेत नजर आई। ऐसा लगता है कि अधिकारियों ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध कर अवैध रेत भंडारण की जांच की है। वहीं खनिज अधिकारियों और ठेकेदार के बीच सांठगांठ की बात भी सामने आई है।
हमने इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद प्रशासन एक्शन मोड में आया। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर खनिज विभाग की टीम करपावंड तहसील के छिंदगांव पहुंची जरूर थी, मगर जांच के नाम पर महज दिखावा ही किया गया। गांव में 1 हजार ट्राली से अधिक रेत डंप थी, मगर खनिज विभाग को महज 200 ट्राली ही रेत नजर आई। विभाग ने सरपंच पति शरद बघेल एवं एक ठेकेदार को नोटिस जारी करने की जानकारी तो दी है, लेकिन नोटिस की विस्तृत जानकारी छुपा दी गई।पुख्ता जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के एक ठेकेदार ने खनिज विभाग से सेटिंग कर रखी है। खनिज विभाग के इशारे पर सरपंच पति एवं पंच द्वारा पेटफुली नदी से रेत का अवैध उत्खनन कर छिंदगांव पंचायत के गौठान में लगभग 1000 ट्राली रेत डंप की गई है। इसकी शिकायत किए जाने पर एसडीएम बकावंड मनीष वर्मा के आदेश पर खनिज विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी लेकिन सांठगांठ के चलते जांच के नाम पर सिर्फ औपचारिकता ही पूरी की वापस लौट आई है।

रॉयल्टी की क्षति का हिसाब नहीं
खनिज विभाग की टीम को मौके से वापस आए चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन इस रेत कांड में शासन को रायल्टी के रूप में मिलने वाली कितने रुपयों की क्षति हुई है, विभाग उसका आंकलन अब तक नहीं कर पाया है। विभागीय अधिकारी रॉयल्टी को लेकर बोलने से बच रहे हैं। विभाग द्वारा जारी विज्ञप्ति में रॉयल्टी की क्षति एवं कितनी जुर्माना वसूली की रकम का कहीं भी जिक्र नहीं है। खबर है कि जिले से बाहर के एक ठेकेदार के इशारे पर जेसीबी से अवैध रेत का उत्खनन किया जा रहा था। विभाग उक्त वाहन को भी जप्त नहीं किया गया है। यह भी एक बड़ा रहस्य है। अब देखने वाली बात यह है कलेक्टर आकाश छिकारा और एसडीएम मनीष वर्मा इस बड़े रेत घोटाले में क्या एक्शन लेते हैं,?

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