असंतुष्ट पार्षदों ने नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ लाया अविश्वास प्रस्ताव, अविश्वास प्रस्ताव के मतदान से पहले ही अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा, कांग्रेसी पार्षदों ने भी नही दिया साथ
बलरामपुर:- नगर पालिका परिषद बलरामपुर के कांग्रेस समर्थित अध्यक्ष गोविंद राम के कार्यों से असंतुष्ट होकर नगर पालिका उपाध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष सहित 14 पार्षदों के द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था जिस पर आज नगरपालिका कार्यालय के सभाकक्ष में मतदान हुआ जिसमें अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में 14 के 14 पार्षदों में वोटिंग किया। वही वोटिंग प्रक्रिया के दौरान नगर पालिका अध्यक्ष गोविंद राम उपस्थित नहीं रहे संपूर्ण वोटिंग प्रक्रिया एसडीएम की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
गौरतलब है कि नगर पालिका परिषद बलरामपुर के चार भाजपा पार्षद तीन निर्दलीय पार्षद एवं 7 कांग्रेस के पार्षद के द्वारा नगर पालिका अध्यक्ष गोविंद राम के कार्यों से असंतुष्ट होकर अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। पार्षदों ने आरोप लगाया था कि अध्यक्ष विकास कार्यों में रुचि नहीं लेते जिस कारण शहर का विकास ठप पड़ गया है। शहर में ऐसी स्थिति हो गई है कि छोटे-छोटे विकास कार्य भी पार्षदों को कराना मुश्किल हो गया है। नगर पालिका अध्यक्ष के द्वारा मनमानी पूर्वक कार्य किया जाता है। अविश्वास प्रस्ताव पर नगर पालिका के सभाकक्ष में मतदान कार संपन्न हुआ 12 से 1 तक मतदान की प्रक्रिया चली वही 20 मिनट के बाद परिणाम की घोषणा कर दी गई 14 के 14 पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया वही नगर पालिका अध्यक्ष इस दौरान उपस्थित नहीं रहे।

भाजपा कांग्रेस के नेता भी रहे नदारद :-
बलरामपुर रामानुजगंज जिले में एकमात्र नगर पालिका बलरामपुर है ऐसे में राजनीति के हिसाब से एवं जिला मुख्यालय होने कारण बलरामपुर नगर पालिका बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है कि यहां पर किस पार्टी का कब्जा है ऐसे में कांग्रेस समर्थित अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाया गया परंतु आज मतदान प्रक्रिया के दौरान भाजपा कांग्रेस के नेता नदारद रहे जो चर्चा का विषय बना रहा।
मतदान प्रक्रिया के प्रारंभ होने के 1 घंटे पहले दिया नगर पालिका अध्यक्ष ने इस्तीफा –
आज नाटकीय घटनाक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष गोविंद राम ने मतदान प्रक्रिया प्रारंभ होने के 1 घंटे पूर्व कलेक्टर एवं सीएमओ त्यागपत्र सौंपा। क्या पत्र में परिवारिक समस्याओं कारण पदीय दायित्वों के निर्वहन कर पाने में परेशानी का जिक्र किया गया।
आपसी खींचातानी में शहर का विकास कार्य हो रहा था प्रभावित –
जिस प्रकार से बीते ढाई वर्षो में सीएमओ एवं नगर पालिका अध्यक्ष के कार्यशैली को लेकर पार्षद संतुष्ट नहीं रहे इस कारण शहर का विकास कार्य प्रभावित हो रहा है स्थिति ऐसी हो गई है कि छोटे-छोटे जो अति आवश्यक कार्य है वह भी नहीं हो पा रहे हैं।
कांग्रेस समर्थित अध्यक्ष का कांग्रेस के पार्षदों ने भी नहीं दिया साथ –
जब गोविंद राम नगर पालिका अध्यक्ष बने थे उस समय ने 9 वोट मिले थे परंतु वे कांग्रेस के पार्षद तक़ को संतुष्ट नहीं कर पाए जिस कारण कांग्रेसी पार्षदों का भी इन्हें साथ नहीं मिला जबकि नगर पालिका में इन्हें लेकर 8 कांग्रेसी पार्षद है। गोविंद राम एक निर्दलीय पार्षद के समर्थन के बाद अध्यक्ष बने थे।
अध्यक्ष हटाने के लिए पक्ष विपक्ष एवं नर्दलीय हुए एकजुट –
कांग्रेस समर्थित अध्यक्ष के कार्यशैली को लेकर पार्षदों में किस प्रकार की नाराजगी थी उसे इस बात से समझा जा सकता है कि भाजपा के पार्षद इनसे से असंतुष्ट थे वहीं निर्दलीय एवं कांग्रेस समर्थित भी पार्षद इन की कार्यशैली को लेकर असंतुष्ट थे जिस कारण सभी एकजुट होकर अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में वोट किया।
