बाढ़ से घर और खेत दोनों प्रभावित, किसानों के सामने दोहरा संकट
बस्तर। बस्तर विकासखंड के बाढ़ प्रभावित मधोता, खैरगुड़ा, भैंसगांव, बोदरा, टिकनपाल, उसरी और सोनारपाल सहित कई गांवों में लगातार बारिश और बाढ़ से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। कई स्थानों पर घरों में पानी घुसने से मकानों को नुकसान पहुंचा है, वहीं खेतों में खड़ी धान की फसल लंबे समय तक पानी में डूबे रहने के कारण अब सड़ने और सूखने लगी है। कई एकड़ फसल प्रभावित होने की स्थिति सामने आ रही है।

किसानों का कहना है कि धान की खेती में खाद, बीज, दवा और मजदूरी पर काफी खर्च किया गया है। कई किसानों ने खेती के लिए ऋण भी लिया है। ऐसे में फसल खराब होने से उन्हें कर्ज चुकाने और परिवार का खर्च चलाने की चिंता सताने लगी है। पानी उतरने के बाद खेतों में धान के पौधों की जड़ों में सड़न दिखाई दे रही है, जिससे नुकसान बढ़ने की आशंका है।
बाढ़ प्रभावित किसानों में कुछ ने प्रधानमंत्री फसल बीमा कराया है, लेकिन बीमा दावा करने की प्रक्रिया और नुकसान की सूचना देने संबंधी जानकारी कई किसानों को स्पष्ट नहीं है। वहीं जिन किसानों ने फसल का बीमा नहीं कराया है, वे प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान पर शासन से मिलने वाली राहत को लेकर जानकारी चाहते हैं।
किसानों की मांग है कि प्रशासन प्रभावित गांवों में मकान और फसल नुकसान का मौके पर सर्वे कराए और वास्तविक क्षति दर्ज करे। साथ ही बीमित किसानों को दावा प्रक्रिया की जानकारी तथा बिना बीमा वाले पात्र किसानों को प्राकृतिक आपदा राहत के प्रावधानों की जानकारी दी जाए। किसानों का कहना है कि समय पर सर्वे और राहत प्रक्रिया शुरू होने से ही बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई में उन्हें सहायता मिल सकेगी।
