हे भगवान ! नौनिहालों की जान से ऐसा खिलवाड़….!
बकावंड (अर्जुन झा) :- बस्तर जिले में सिस्टम अपाहिज हो चुका है।जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के कर्मियों की संवेदना दम तोड़ चुकी है। भ्रष्ट तंत्र अब नौनिहालों की जान से भी खिलवाड़ करने पर आमादा हो गया है। बकावंड और बस्तर विकासखंडों में निर्माण कार्यों में जमकर अनियमितता बरती जा रही है। भ्रष्ट कर्मचारी और पंचायत प्रतिनिधि अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए बच्चों की जान से भी खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ग्राम पंचायत केशरपाल में इसका एक बड़ा उदाहरण सामने आया है।

बकावंड जनपद पंचायत क्षेत्र की सीमा से लगी विकासखंड बस्तर की ग्राम पंचायत केशरपाल -2 में आंगनबाड़ी भवन के आभाव में नौनिहालों को एक ऐसे मकान में पढ़ाया जा रहा है, जो बुरी तरह जर्जर हो चला है। यह मकान पटवारी कार्यालय के लिए बनाया गया है। मकान की दीवारें हैं तो पक्की, लेकिन छत खपरैल वाली है। खपरैल टूट फूट चुकी हैं। जिन बल्लियों और म्याल के सहारे खपरैलें टिकी हुई हैं, वे भी सड़ चुकी हैं। बरसात का पानी कमरे भरा रहता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता और सहायिका रोज कमरे से पानी को बर्तनों की मदद से बाहर कर पूरे कमरे में पोंछा लगाती हैं। इसके बाद ही बच्चों को वहां बिठाकर पढ़ाई और उनकी देखरेख शुरू की जाती है। इस बीच पानी गिरने लग जाता है, तब आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता, सहायिका और सारे बच्चे तरबतर हो जाते हैं। फिर बच्चों को आसपास स्थित सुरक्षित मकानों में पहुंचाकर उनकी प्राण रक्षा की जाती है। खपरैल वाली छत के भरभरा कर टूट जाने का खतरा हमेशा बना रहता है। बारिश के इस मौसम में यह खतरा और भी बढ़ गया है। भगवान न करे ऐसा हो। अगर ऐसा हुआ तो कई बच्चों की जान जा सकती है। तब आखिर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा ? निश्चित रूप से केशरपाल ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव इसके लिए जवाबदेह माने जाएंगे। क्योंकि उन्हीं की मनमानी और स्वार्थलिप्सा के कारण नए आंगनबाड़ी भवन का निर्माण अटका हुआ है।
दो साल से अधूरा पड़ा है भवन निर्माण
केशरपाल 2 में आंगनबाड़ी भवन निर्माण के लिए दो साल पहले लाखों रुपए स्वीकृत हुए हैं? महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के परियोजना अधिकारी ने निर्माण कार्य की जिम्मेदारी सरपंच और पंचायत सचिव को दे रखी है। दो साल में सिर्फ नीव खोदाई – भराई और पिलर के लिए छड़ें लगाने और प्लींथ का ही काम हो पाया है। इतने से कार्य में लाखों रुपए खर्च हो जाने का उल्लेख ग्राम पंचायत के दस्तावेजों में किए जाने की खबर है। ग्रामीण बताते हैं कि सरपंच और सचिव ने आंगनबाड़ी केंद्र भवन निर्माण के नाम पर सरकारी रकम की जमकर अफरा तफरी की है। पिलर बनाने के लिए लगाई गई छड़ों में जंग लग चुकी है। ये छड़ें आंगनबाड़ी भवन को किस हद तक मजबूती दे पाएंगी, इसका अंदाजा उनकी हालत देखकर लगाया जा सकता है। आंगनबाड़ी में पढ़ने वाले बच्चों के माता पिता और अन्य ग्रामीण सरपंच से कई बार आग्रह कर चुके हैं कि आंगनबाड़ी भवन को जल्द पूरा कराया जाए। सरपंच कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। वहीं मनरेगा के परियोजना अधिकारी ने कहा है कि बरसात का मौसम खत्म होते ही निर्माण कार्य आरंभ कर दिया जाएगा।
