सेजस अलनार में मनाई गई स्वामी आत्मानंद जी की जयंती

बकावंड। सेजस अलनार विद्यालय में आज स्वामी आत्मानंद की जयंती श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाई गई। यह अवसर केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और प्रेरणा का महापर्व बन गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य लैखन बघेल द्वारा दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण से हुआ। स्वामी आत्मानंद के चित्र के समक्ष जब दीपक की लौ जली, तो मानो पूरे वातावरण में ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा की किरणें फैल गईं। इसके बाद बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीत, कविता पाठ और नाट्य मंचन ने सभी का हृदय छू लिया। छोटे-छोटे बच्चों की मासूम आवाज में जब “जय स्वामी आत्मानंद जी” का उद्घोष गूंजा, तो पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया। अपने संबोधन में प्रधानाचार्य लैखन बघेल ने कहा- स्वामी आत्मानंद जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि शिक्षा केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है। यह वह साधन है जो हमें अच्छे संस्कार, जिम्मेदारी और समाजसेवा की भावना देता है। एक सच्चा विद्यार्थी वही है जो स्वामी जी के आदर्शों को अपने जीवन में उतारे और हर दिन कुछ बेहतर करने की प्रेरणा ले। उन्होंने आगे कहा कि स्वामी आत्मानंद जैसे महापुरुषों के जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि संघर्ष कभी रुकावट नहीं, बल्कि सफलता की सीढ़ी होता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे शिक्षा को केवल परीक्षा के अंकों तक सीमित न रखें, बल्कि जीवन के मूल्यों को भी सीखें। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने भी अपने विचार रखे और बच्चों के प्रयासों की प्रशंसा की। सभी ने मिलकर यह संकल्प लिया कि वे शिक्षा के साथ-साथ नैतिकता, अनुशासन और सेवा भाव को अपने जीवन का हिस्सा बनाएंगे।कार्यक्रम का समापन सामूहिक प्रार्थना और जय स्वामी आत्मानंद जी के उद्घोष के साथ हुआ।यह आयोजन न केवल एक कार्यक्रम रहा, बल्कि एक अनुभव बन गया,
जो बच्चों के दिलों में संस्कारों की लौ जलाकर, शिक्षा को एक नई दिशा दे गया।

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