कवियों ने मनाई कविताओं से सराबोर रंगपंचमी
बीजापुर :- जिले के साहित्यकार लगातार अपनी कलम की छाप जिला व राज्य तथा देश में छोड़ते हुए सुर्खियों में रह रहे हैं और जब अपने व्यक्तिगत व्यस्ततम जिन्दगी से समय निकालकर एक दूसरे से मिलते हैं तो फिर कविताओं की महफिल जम जाती है । कुछ ऐसा ही पल जिले के कवियों के लिए यादगार रहा जब रंगपंचमी के त्यौहार में स्वीमिंग पूल गार्डन में होली मिलन समारोह के अवसर पर गोष्ठी हुई। गोष्ठी में एक ओर जहाँ रंगों की महकती छटा बिखरी वहीं कवियों ने भी एक से बढ़कर एक रचनाओं से माहौल खुशनुमा कर दिया। डॉ.अमितेश तिवारी ने अपने कविता में एक प्रेमी के फटीचर हाल के पीछे अपने प्रियतम को जिम्मेदार बताया तो गायत्री ठाकुर ने तीनों देवों पर चुटकुले सुनाकर गुदगुदाया। बीरा राजबाबू ‘प्रखर’ ने आई फागुन की बहार, ये है होली का त्यौहार, मिल कर उड़ाओ रंग, बांटो सबसे प्यार”, का गीत गाकर माहौल बना दिया। दिलीप उसेंडी ने पंख कतरे हुए पंक्षी के दर्द को प्रतीक बनाकर ताजा हालात को बयां किया। डॉ.राजकुमार टंडन ने साहित्य में समर्पण पर बात रखी। रूप सुंदरी शशि किरण महंत ने मुख मुरली बजाए की धुन गाकर दिल जीता। सुयश शर्मा और जीवनलाल साहू ने सभी रचनाकारों का रसिक बनकर रसास्वादन किया और खूब ठहाके लगाए । कविताओं और रंगों का नशा इस कदर सभी कलमकारों के सिर चढ़ा की इस रंगपंचमी का नशा सलों साल चढ़ा रहेगा।
