हर रोज छात्रों को परोसी जाती है थाली में ताजी व हरी सब्जियाँ

राजदीप शर्मा
छोटे कापसी l प्राकृतिक रूप से ताजी एवं हरी सब्जियां यदि रोजाना लंच की थाली में मिल जाए तो भोजन का जायका ही बदल जाता है। स्कूलों से आए दिन भोजन की न्यून गुणवत्ता की खबरें सुनने को मिल जाती है लेकिन कभी-कभी स्कूलों की सुंदर तस्वीर भी देखने को मिल जाती हैं। एक ऐसा ही स्कूल है शासकीय प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय ताड़वायली, जहां से एक बेहतरीन तस्वीर उभर कर सामने आ रही है.

पखांजूर मुख्यालय से 52 किलोमीटर दूर वनांचल ग्राम ताड़वायली में संचालित प्रथमिक सह-पूर्व माध्यमिक शाला में कार्ययोजना अनुसार प्रगति पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।

स्कूल की भूमि के सदुपयोग के साथ ताजी सब्जियों के उपयोग से पोषक तत्वों की कमी की पूर्ति होगी। किचन गार्डन विकसित करने से परस्पर सहयोग की भावना विकसित हुई है। उत्तम गुणवत्ता वाली सब्जियां बच्चों को खाने में मिलेगी। इससे विद्यार्थियों को अपने घरों पर सब्जियां उगाने का अनुभव मिलेगा और उद्यानिकी के जरिए भविष्य में आजीविका कमाने की उम्मीद बढ़ेगी।

संस्था के शिक्षक अशोक मृधा ने बतलाया कि हमारे दोनो संस्थाओं की प्रभारी प्रधान पाठक रमेश कुमार टंडन के कुशल प्रबंधन, हमारे संस्था के परीविक्षाधीन शिक्षिका सुश्री भारती शोरी की पढा़ई और संस्कृति कार्यक्रम के क्षेत्र में अहम योगदान रहे हैं, श्यामलाल मण्डावी,जयसिंह मंडावी,अतिथि शिक्षिका पोया मैम, हमारे दोनो रसोईया तथा दोनों संस्थाओं के सफाई कर्मचारी नड़गू उईके एवं मनोज वड्डे कि सुबह से शाम तक समय देकर संस्था के प्रगति के लिए अच्छे कार्य कर रहे हैं।

साथ ही हमारे दोनों संस्था के ऊर्जावान छात्र -छात्राओं का योगदान भी संस्था के प्रगति में चार-चांद लगा रहे हैं सभी बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ, रंगोली, गायन व नृत्य के अलवा यूकोक्लाब के अन्तर्गत अच्छे बागवानी का भी कार्य कर रहे हैं जहां उन्हें जैविक खाद व जैविक किटनाशक का उपयोग करतें हुए उत्कृष्ट खेती करना सीख रहे हैं जहां उन्होंने विभिन्न प्रकार के फलदार वृक्षों के अलवा उत्कृष्ट फूलों की बागवानी, विभिन्न प्रकार के सब्जी जैसे फुलगोभी, पत्ता गोभी,गाडगोभी,आलू,बैगन, भिन्डी, टमाटर, पुईभाजी, धनिया पत्ती, सागभाजी की खेती कर ज्ञान प्राप्त करने के साथ पौधे की विभिन्न अंग एवं उनके कार्य का भी जानकारी लेते हुए उपज किये गये सब्जी मध्यान्ह भोजन में भी उपयोग किया जा रहा है।

बच्चों के द्वारा किये गये कार्य को गांव वालों ने भी तारीफ कर रहे हैं।

इसके अलावा सबसे ज्यादा योगदान हमारे गांव के सहज सरल और कर्मठ वनवासी भाई बहनों बुजुर्ग माताओं जनप्रतिनिधि एवं शाला प्रबंधन समिति के रहा जिनकी योगदान हम सबको संस्था के प्रगति के लिए प्रेरित करते रहे और हमारे सभी शैक्षणिक अमला इन क्षेत्रों में निरंतर कार्य करतें हुए संस्था को आगे बढ़ा रहे हैं।

शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सत्तु कोवाची व पुर्व सरपंच सायदो वाई वडडे ने शासन प्रशासन से मांग की है कि अभी हमारे स्कूल में कच्ची बाउंड्री वाल है इसे अतिशिघ्र पक्की लाउंड्री वाल की स्वीकृति प्रदान किया जाएं क्योंकि स्कूल मुख्य सड़क एवं तालाब से ‌लगे है जिससे बच्चों का बडे़ दुर्घटना होने की भयसताती रहती है। साथ ही फलदार पौधे को जानवरों के द्वारा खाने व नष्ट करने की सम्भावना रहती है।

जिसे स्कूल परिसर में तैयार किया जा रहा है। किचन गार्डन में जैविक खाद एवं जैविक कीटनाशक के प्रयोग से पैदा की गई सब्जियां प्रतिदिन बच्चों को मध्याह्न भोजन की थाली में परोसी जाएगी। पौष्टिक भोजन लेने से विद्यार्थियों के शरीर की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ेगी.

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